मंगलवार, 13 अगस्त 2013

अज्ञानी हम ज्ञान क्षीर स परा रहल छी ,
नै बुझल ओ भाब भ्रम में हरा रहल छी , 
हम कहबि संतान हे माँता आहाँ मैथिलि,
अपने हाथे अपन धरा के हरा रहल छी। 

सदबुधि दय रक्षा करू हे माँ ------ पंकज

शनिवार, 20 अप्रैल 2013


गजल

प्रीत लागल आहाँ के झलक देखि कs ,
आहाँ बुझी ने बुझी  आहाँ ई बुझु,
भने बाजी ने बाजी आहाँ हे प्रिये,
बात हमहूँ इसरा में बुझिए गेलौ।

हाथ आंचर पकरने ई कहिए देलक,
आहाँ हमरा धीरज के परईख लेने छि,
आहाँ तइयो नई हमरा कही हे प्रिये,
हम बुझब आहाँ आरो व्याकुल छि।

तृप्त पुलकित ओ खनहन नयन देखि कs
मुग्द मादक मधुर मन बनाइये देलऊ,
आहाँ चाहे भले ना कही हे प्रिये,
हमर मोनक ओ धधरा जगाइए देलऊ।  

पंकज झा

सोमवार, 12 नवंबर 2012

हम मैथिल संतान कहाबी

हम मैथिल संतान कहाबी 
नित नविन गीत हम गावी,.
विद्वानक नगरी सँ आवी 
स्नेह आर आशीष हम पावी।

जाते सिया के जन्म भेल 
उगना रूप महादेव लेल ,
कोशी,कमला,गंडक धारा
हिम सँ निकली कs गँगा गेल। 

विद्यापती, वाचस्पति, मंडन 
करी हम सब संतक बंदन,
जँ जीवन हम मनुखक पावी 
तs हे प्रभु हम मिथिला आवी।
     
 "पंकज" 

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

दहेजक लीला


बुधवार, 30 मई 2012

गजल

आहाँ सदी खन सुनायब सुनल गीत त,
हमर मोनक ओ धधरा पजरि जाईया,
आ जों नवका नई आबे कोनो गीत त,
बनि श्रोता लोक अपने सम्हरि जाईया,

भेल भानस पर पांहूँन जों आइबे गेला,
तहन भरल कटोरी तिमन नई भेटत,
आ जों खखसब जे परसन भेटेय झोर त,
चैन खापैर स फुटत ताई में नई दुमत,

छूछ हाथे जे सासुर गेलउ त बुझु ,
सासु पूछती जे ओझा खेबो करथिन?
आ जों भरल चंगेरा गेलइ भार त,
मोंन  नक् सक भले हो ओ नई मानथिन.

वोट देब स पहिने नेता स सुनु 
कहत आँही छि माता पिता छि आँही 
वोट भेला पर कतोउ नेता ज भेटत,
कहत आहा के कतोउ हम देखने रही.

पंकज झा 

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

हमर पुरखा बड महान

गाबैत रही सदिखन एकेटा गुणगान,
हमर पुरखा बड महान,हमर पुरखा बड महान,हमर पुरखा बड महान......
पुरखा छला एहन ओहन, हम छि निठला, 
ओ अरजला बाबन बीघा, भले हम बेलला,
पान तमाकुल भेटिया ने, बचई  छि खेत खर्हियान,
हुनके हम बंसज छि, नामी छल हमर खानदान,
हमर पुरखा बड महान......३
खान पान हुनकर छल, तरुवा बगारुवा, 
तिमन तरकारी छल, अरुवा खम्हरुवा,
हम खाई छि चिकन अंडा, कहियो काल मदिरा-पान,
लोक भले किछो कहै, हमर अईछ अपन शान,
हमर पुरखा बड महान.....३
धोती आ कुरता पर, बंडी आ दोप्ता छल,
माथ जखन पाग चढ़ाई, भेटजाई दुगुना बल, 
हम लुंगी धारी छि, आ गपि नै हमर समान,
हमरा स लगाब त, हरि लेब हम आहाक प्राण,
हमर पुरखा बड महान......३

शनिवार, 21 जनवरी 2012

ढाढस

ढाढस बन्ही सुतल छि हमहूं, 
ओढ़ी चादर गरदेन मस्लंग,
आ गप के बेरा उठालौ हमहूं
द क गोली पिसुवा भंग.

ज्ञानी छि नै ककरो स कम,
नै बुझी हम दोसरक ढंग,
हम बुधियरबा हमरा की कहब,
हमारा स काबिल अई आहा के संग?

सुनु सिर्फ जे हमही कही,
नै त क देब आहा के तंग,
आ दल बना क रखने छि हम,
करय लेल बस आहा स जंग.

आहा कोना करब जखन नै,
पार लागल कायल हमरा संग,
आ कोशिश करब त चिन्ह लिया जै,
हम बक्थोथर केहन दबंग.

नई किछु करब नई करा देब,
इ अईछ हमर अपन रंग,
आहा के आगा कोना बढ़ दी,
जिनगी बीतल नेता के संग.

पंकज