गुरुवार, 19 जून 2014

हम बुरबकहा बात की बुझब,
एक स एक पढुवा आहि ठाम,
ककरो कियो मोजर नई करइ,
बदैल रहल अइछ मिथिला धाम।

हम अधलाहा कान थोपी कS,
सुनी रहल छी भजन अजान,
मुदा मोजर बस ओकरे छई जे,
गप सँ हरी लेत दोषरक प्राण।  

नई बाजू यो गोरका कक्का,
बाप पित्ती के नई कोनो मान,
किछु कहबई तँ झट स थुकि देत,
देहे पर ओ खा का पान।

धीया-पुता की बरका-जेठका,
एकहि ढठा एकहि शान,
खखइश दियउ त प्राण अवग्रह,
क देत सबटा बजा समांग।

की ई ओ मिथिला छई जक्कर,
करइ छलौ हम सब गुमान,
बरको भइया के देखिते सब,
पर जाइत छल छोइर दलान।

"पंकज"  

शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

श्रृंगार करू श्रृंगार करू माँ मैथिलि के श्रृंगार करू,
हे मैथिल जन श्रृंगार करू...
नई चाही हिनका आभूषण, नई चाही कोनो बलि अर्पण, 
उठू जागु बॉन्हु अपन शिखा के, अपमानक प्रतिकार करू,
हे मैथिल जन श्रृंगार करू.

पंकज 
नई करबऊ आब लाज़,
गगन में गूंजी रहल आवाज़,
रे आब त मिथिले चाही,
बुझलकइ नवतुरिया आब नाज,
पहिरती माँ मैथिलि ताज,
रे बऊवा आबई जाही.

करतइ जे अपमान,
से भ जो आब तौ साबधान,
जागल छई मैथिल मीता,
इ धरती के मान,
बढ़ेली जगत केर अभिमान,
ओ कहबि हमर सीता.

भेलइ भंग आब मोह,
ह्रदय के कय देलक पनिसोह,
देखलीयई बहुत तमसा
अपन घर तौ जो,
निर्देईया आर ने हमरा खो
नई तोरा स कोनो आशा.

पंकज
 —

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

अज्ञानी हम ज्ञान क्षीर स परा रहल छी ,
नै बुझल ओ भाब भ्रम में हरा रहल छी , 
हम कहबि संतान हे माँता आहाँ मैथिलि,
अपने हाथे अपन धरा के हरा रहल छी। 

सदबुधि दय रक्षा करू हे माँ ------ पंकज

शनिवार, 20 अप्रैल 2013


गजल

प्रीत लागल आहाँ के झलक देखि कs ,
आहाँ बुझी ने बुझी  आहाँ ई बुझु,
भने बाजी ने बाजी आहाँ हे प्रिये,
बात हमहूँ इसरा में बुझिए गेलौ।

हाथ आंचर पकरने ई कहिए देलक,
आहाँ हमरा धीरज के परईख लेने छि,
आहाँ तइयो नई हमरा कही हे प्रिये,
हम बुझब आहाँ आरो व्याकुल छि।

तृप्त पुलकित ओ खनहन नयन देखि कs
मुग्द मादक मधुर मन बनाइये देलऊ,
आहाँ चाहे भले ना कही हे प्रिये,
हमर मोनक ओ धधरा जगाइए देलऊ।  

पंकज झा

सोमवार, 12 नवंबर 2012

हम मैथिल संतान कहाबी

हम मैथिल संतान कहाबी 
नित नविन गीत हम गावी,.
विद्वानक नगरी सँ आवी 
स्नेह आर आशीष हम पावी।

जाते सिया के जन्म भेल 
उगना रूप महादेव लेल ,
कोशी,कमला,गंडक धारा
हिम सँ निकली कs गँगा गेल। 

विद्यापती, वाचस्पति, मंडन 
करी हम सब संतक बंदन,
जँ जीवन हम मनुखक पावी 
तs हे प्रभु हम मिथिला आवी।
     
 "पंकज" 

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

दहेजक लीला